जानिए श्याम बाबा से जुड़ी हुई 10 महत्वपूर्ण बातों को जो आज हम आपके साथ शेयर करेंगे

नवदुर्गा की घोर तपस्या करके उन्हें तीन उन्हें तीन अमोघ बाण प्राप्त हुए जिस कारण से उनका नाम तीन बाणधारी पड़ा

महाभारत के युद्ध में जाने से पूर्व उन्होंने अपनी माता को वचन दिया कि वह हारे हुए पक्ष का साथ देगा इसलिए उन्हें हारे का सहारा भी कहा जाता है

उन्होंने ब्राह्मण रूप में आए श्री कृष्ण जी को अपने शीश का दान किया जिस कारण से उनका नाम शीश का दानी भी पड़ा

शीश का दान करने के पश्चात भगवान कृष्ण ने उन्हें कलयुग में श्याम के नाम से प्रसिद्ध होने का वरदान दिया

क्या आप जानते हैं बाबा श्याम ने अपना शीश का दान फाल्गुन माह की द्वादशी को किया था

आज उनके इसी शीश की पूजा खाटू नगर में बाबा श्याम के नाम से की जाती हैं

बाबा श्याम का मंदिर वर्तमान में राजस्थान राज्य के सीकर जिले में पड़ता है

जहां पर बाबा श्याम का शीश मिला था वहां एक गाय उस स्थान पर आकर रोज दूध की धारा बहा रही थी बाद में खुदाई में शीश प्रकट हुआ

कार्तिक माह की एकादशी को बाबा श्याम का जन्मदिन मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन बाबा श्याम का शीश मंदिर में सुशोभित किया गया था

बाबा श्याम पहले बर्बरीक के नाम से जाने जाते थे जो भीम के पुत्र घटोत्कच और मोरबी के पुत्र थे